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नवजातों में होंठकटने-फटने की समसà¥à¤¯à¤¾, यह है बचाव और इलाज
नवजात के होंठकà¥à¤› कटे-फटे होना चिंता का विषय नहीं होना चाहिà¤, लेकिन अगर यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ लंबी अवधि तक बनी रहती है तो फिर सà¤à¥€ आशंकाओं की पड़ताल कर ली जानी चाहिà¤à¥¤ नवजातों में फटे होठों की समसà¥à¤¯à¤¾ की कई वजहें...
नवजात के होंठकà¥à¤› कटे-फटे होना चिंता का विषय नहीं होना चाहिà¤, लेकिन अगर यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ लंबी अवधि तक बनी रहती है तो फिर सà¤à¥€ आशंकाओं की पड़ताल कर ली जानी चाहिà¤à¥¤ नवजातों में फटे होठों की समसà¥à¤¯à¤¾ की कई वजहें हो सकती हैं। जैसे:
डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ नवजात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को अगर परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ या किसी तरह से दूध न मिले तो à¤à¥€ उनके होंठसूख कर फट सकते हैं। जिस दिन मौसम जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गरà¥à¤® हो, उस दिन बचà¥à¤šà¥‡ को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बार दूध पिलाने की जरूरत पड़ सकती है। शिशà¥à¤“ं में डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के कà¥à¤› अनà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ इस पà¥à¤°à¤•ार हैं-खोपड़ी के ठीक बीच सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ नरà¥à¤® à¤à¤¾à¤— (फोंटानेल) धंसा हà¥à¤† होना।
आंखें à¤à¥€à¤¤à¤° धंस जाना
रोने के दौरान आंखों से आंसू नहीं आना
तà¥à¤µà¤šà¤¾ सूख जाना
हाथ-पैर बहà¥à¤¤ ठंडे पड़ जाना
उनींदापन
धड़कन तेज होना
तà¥à¤µà¤šà¤¾ की पपड़ियां निकलना
वैसे तà¥à¤µà¤šà¤¾ की पपड़ियां निकलना या परत निकलना à¤à¤• सामानà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ की परतें विकसित हो रही होती हैं, लेकिन यह तà¥à¤µà¤šà¤¾ व होठों के सूखने की वजह à¤à¥€ हो सकती है।
होठों को चूसते या चाटते रहना
मां का दूध पीने की सतत आदत के कारण बचà¥à¤šà¥‡ जब सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ न कर रहे हों, तब à¤à¥€ होठों से चूसने जैसी मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ बनाते रहते हैं। यह à¤à¥€ होठों के सूखने की वजह बन सकता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके कारण मà¥à¤‚ह की लार बाहर निकलकर उड़ जाती है। इससे उनके डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का सà¥à¤¤à¤° और अधिक बढ़ जाता है।
संवेनदनशील तà¥à¤µà¤šà¤¾
नवजात शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ बेहद संवेदनशील होने के कारण à¤à¥€ होठकट सकते हैं। कà¥à¤› नवजात पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤§à¤¨ सामगà¥à¤°à¥€ को लेकर संवेदनशील होते हैं, इसलिठअगर मेकअप किठकिसी शखà¥à¤¸ ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ चूम लिया तो à¤à¥€ उनकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर खराश आ सकती है। कपड़े, वाइपà¥à¤¸, लोशन और कà¥à¤°à¥€à¤® से à¤à¥€ नवजात शिशà¥à¤“ं को परेशानी हो सकती है।
दवाà¤à¤‚
कà¥à¤› दवाओं के साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ के चलते à¤à¥€ शिशà¥à¤“ं के होठकट-फट सकते हैं। इसलिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कोई à¤à¥€ दवा देने से पहले चिकितà¥à¤¸à¤•ों और बालरोग विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ से सलाह ले ली जानी चाहिà¤à¥¤
मौसम में बदलाव
नवजात शिशà¥à¤“ं के होंठकटने-फटने की समसà¥à¤¯à¤¾ सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और तेज हवाओं के कारण देखने को मिल सकती है। मौसम में बदलाव शिशà¥à¤“ं की तà¥à¤µà¤šà¤¾ से नमी को सोख लेता है, जिससे उसके होठसूखे और कटे-फटे हो सकते हैं।
पोषण की कमी
कà¥à¤› पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी बेहद कम मामलों में नवजात शिशà¥à¤“ं में होठके कटने-फटने की समसà¥à¤¯à¤¾ के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होती है। पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का सही संतà¥à¤²à¤¨ नहीं होने का असर होठों से साफ समठआ सकता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• किया जाना चाहिà¤à¥¤
कावासाकी डिसीज
यह शिशà¥à¤“ं और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की à¤à¤• असामानà¥à¤¯ बीमारी है। इसमें बà¥à¤–ार बहà¥à¤¤ लंबी अवधि तक चलता है और खून की नसें फूल जाती हैं। तीन माह से कम उमà¥à¤° के शिशà¥à¤“ं में बहà¥à¤¤ कम पाई जाने वाली यह बीमारी आमतौर पर 6 माह से 2 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° तक के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में देखी जाती है। कावासाकी डिसीज में होठकटने के अलावा लाल हो जाते हैं और यह बà¥à¤–ार, लाल चकतà¥à¤¤à¤¾à¥‡à¤‚ के अलावा बांहों-पैरों में सूजन की à¤à¥€ वजह बन सकता है।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह
जब आपको लगे कि नवजात की होठकटने-फटने की समसà¥à¤¯à¤¾ उसके कà¥à¤› बड़े होने के बाद à¤à¥€ कायम है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• किया जाना चाहिà¤à¥¤ डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ व अनà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ से लिया जाना चाहिà¤à¥¤
बचाव के तरीके
- घर को à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤° और सà¥à¤–द तापमान पर रखने की कोशिश करें।
- शिशॠको मौसम के अनà¥à¤•ूल कपड़े पहनाà¤à¤‚।
- शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ संवेदनशील होने के कारण बॉडी लोशन, कà¥à¤°à¥€à¤®à¥à¤¸ का चयन सावधानीपूरà¥à¤µà¤• करें।
- नवजात शिशॠको नियमित तौर पर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने, खासतौर पर गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के मौसम में, उसे डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ होने से बचाà¤à¤—ा।
- लेनोलिन, नारियल तेल à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ के होठों को नम रखने में मदद करते हैं।
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